Monday, October 15, 2012

रोजगार के खुलते नए द्वार, बढ़ता पर्यटन



भ्रमण का शौक एक अच्छा और रोचक रोजगार बन सकता है। टूरिज्म और ट्रेवल का क्षेत्र आज असीम संभावनाओं वाला क्षेत्र बन चुका है। हमारे विभिन्न ऐतिहासिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक स्थल देश−विदेश के सैलानियों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं। भारत में अनगिनत मंदिरों, किलों, पहाड़ों, जंगलों, समुद्र तटों आदि दर्शनीय स्थलों के अलावा यहां का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों के आकर्षण का केन्द्र है। विदेशी पर्यटकों के साथ−साथ स्वदेशी पर्यटकों की संख्या में भी आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। इन पर्यटकों की यात्रा, आवश्यकताओं और सुख−सुविधाओं के प्रबन्धन के क्षेत्र में अनेक सम्भावनाओं के द्वार खुले हुए हैं।
नवीनता, चमक−दमक, भ्रमण, जीवन्तता आदि से भरपूर इस क्षेत्र में रोजगार की दृष्टि से युवा वर्ग के लिए भरपूर सम्भावनाएं हैं। देशी−विदेशी पर्यटक एडवेंचर, मौजमस्ती, भ्रमण, खेल, मनोरंजन, नये−नये स्थानों, ऐतिहासिक इमारतों, प्राकृतिक सौंदर्य आदि को देखने को लालायित रहते हैं। अपरिचित स्थान और लोगों से सामना होने पर अनेक प्रकार की परेशानियों से सामना होता है और पूछताछ−खोज आदि में समय और धन भी बरबाद होता है। इन पर्यटकों के लिए विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी सहायता के लिए योग्य और प्रशिक्षित लोगों की आवश्यकता निरन्तर बढ़ रही है। इस क्षेत्र को कॅरियर के रूप में अपनाने के लिए टूअर एवं टे्रवल एजेंसी, ट्रांसपोर्ट के की कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी रखना उपयोगी सिद्ध होगा।
भारत भर में अनेकानेक ऐतिहासिक, धार्मिक, सामाजिक, वन्य प्राणी आदि की दृष्टि से महत्वपूर्ण दर्शनीय स्थल हैं। इन्हें देखने के लिए आने वाले पर्यटकों को घुमाने, यात्रा की सही योजना बनाने, पर्याप्त जानकारी देने, रेल, बस, टैक्सी, हवाई जहाज द्वारा यात्रा के शुल्क आदि की विस्तृत विवरण देने, उनके रहने−खानपान का प्रबन्ध करने, लाइसेंस धारक गाइड और आवश्यकतानुसार दुभाषिये का प्रबन्ध करने जैसे अनेक कार्य एक टूअर व ट्रेवल एजेंसी की जिम्मेदारी में शामिल होते हैं। आजकल पैकेज टूअर का चलन है। किसी पर्यटक के लिए इसकी पूरी योजना बनाना माथापच्ची का काम है। योजनाकार को सम्बन्धित स्थानों के बारे में पर्याप्त जानकारी होना आवश्यक है। वहां के भूगोल, इतिहास, मौसम आदि की जानकारी आवश्यक होती है।
पूरी यात्रा के लिए ट्रांसपोर्ट की उचित व्यवस्था करना भी महत्वपूर्ण कार्य है। पैकेज टूअर में विभिन्न स्थलों तक पहुंचाने, यात्रा, होटल आदि में ठहरने, नाश्ता−भोजन और उसकी अवधि आदि का विशेष महत्व होता है। अधिकांश पर्यटक अपनी इच्छा और अपनी जेब को ध्यान में रखकर ही यात्रा करना चाहते हैं। वे इसे ध्यान में रखकर ही सही लगने वाले पैकेज टूअर चुनते हैं। यदि किसी पर्यटक को उपलब्ध कराई जाने वाली तय सुविधाओं में कमी रह जाएगी तो इससे एजेंसी के साथ−साथ देश की छवि भी खराब होगी। अतः हर पर्यटक को महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। 'अतिथि देवो भव' को सदा ध्यान में रखा जाना चाहिए।
ऊर्जावान युवा वर्ग को इस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के लिए उचित प्रशिक्षण लेने के साथ−साथ एकाधिक भाषाएं भी सीखनी चाहिए। इतिहास, भूगोल, संस्कृति, मौसम, परम्पराओं, रीतिरिवाजों आदि के बारे में पर्याप्त जानकारी होनी चाहिए। साथ ही कलात्मक अभिरुचि, मिलनसार स्वभाव, चेहरे पर मुसकान आदि कुछ ऐसे गुण हैं जिन्हें अपनाना लाभदायक सिद्ध होता है। हमारे यहां इस क्षेत्र में प्रवेश के इच्छुक लोगों के प्रशिक्षण की सरकारी−गैरसरकारी स्तर पर कुछ शहरों में व्यवस्था है। प्रवेश लेने से पहले सम्बन्धित संस्थान और उसके शुल्क के अलावा प्लेसमेंट के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। इस क्षेत्र में कार्य और अनुभव के अनुसार हर माह 15−20 हजार या अधिक रुपये आसानी प्राप्त किये जा सकते हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर लेने के बाद कुछ समय किसी एजेंसी में कार्य कर अनुभव प्राप्त कर लेने के बाद साधन जुटाकर अपनी एजेंसी आरम्भ की जा सकती है। तब जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ−साथ आमदनी और लाभ में भी कई गुना बढ़ोत्तरी हो जाती है।
'प्रशिक्षण संस्थान'
− इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एण्ड टेवल मैनेजमेंट, दिल्ली चैप्टर−1, न्याय मार्ग, चाणक्य पुरी, नयी दिल्ली −110021
(एयर ट्रेवल, फेयर एण्ड टिकटिंग के अल्पावधि पाठ्यक्रम, कम्प्यूटरीकृत आरक्षण,)
- इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनीवर्सिटी, (इग्नू), मैदान गढ़ी, नयी दिल्ली−110068
− कोटा ओपन यूनीवर्सिटी, कोटा, राजस्थान
− कुरुक्षेत्र, अन्नामलाई और मदुराई विश्वविद्यालय में पत्राचार पाठ्यक्रम उपलब्ध
− दिल्ली, कुरुक्षेत्र, रोहतक, शिमला, बनारस, गोवा, मद्रास, आगरा, उत्कल (भुवनेश्वर, उड़ीसा), अलीगढ़, मुंबई, बिलासपुर, आदि में 'अल्पावधि व पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा पाठ्यक्रम'
− इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एण्ड टेवल मैनेजमेंट (आईआईटीटीएम),
'अल्पावधि व पोस्ट ग्रजुएशन डिप्लोमा पाठ्यक्रम'
− भारतीय विद्या भवन, कस्तूरबा गांधी मार्ग, नयी दिल्ली−110001
− स्काई लाइन बिजनेस स्कूल, हौज खास एन्क्लेव, नयी दिल्ली
− सीता अकादमी, एम−135, कनॉट प्लेस, नयी दिल्ली−110001
'पत्राचार पाठ्क्रम '(डिप्लोमा)
−कर्नाटक स्टेट ओपन यूनीवर्सिटी, मनसा, गंगोत्री, मैसूर−570006, कर्नाटक
−राजश्री टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय, सत्रह महर्षि दयानन्द मार्ग, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश

अधिक जानकारी के लिए इंटरनेट पर भी खोज की जा सकती है।             -अमित भंडारी 

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