यात्रा-वृतांत लेखन में ह्यूज गैंट्जर और कौलीन गैंट्जर ने अलग मुक़ाम बनाया है। हालांकि शुरू में ह्यूज लेखन को लेकर गंभीर नहीं थे, हालांकि उन्हें घुमक्कड़ी का शौक़ था। लेकिन भारतीय नेवी में रहने की वजह से अपने इस शौक़ को वे पूरा नहीं कर पाते थे। तब उन्होंने भारतीय नेवी की नौकरी छोड़ने का फ़ैसला किया और घुमक्कड़ लेखन के क्षेत्र में अपनी पैठ बनाई। अच्छी बात यह रही कि पत्नी कौलीन ने इस क्षेत्र में आने के लिए न सिर्फ उन्हें प्रेरित किया बल्कि ख़ुद भी घुमक्कड़ी में उनका साथ दिया। नेवी की नौकरी छोड़ने के बाद ह्यूज ने अख़बारों में यात्रा-संस्मरणों पर कॉलम लिखना शुरू किया। ह्यूज को सफ़रनामा लिखने वाले पहले क़ॉलमनवीस होने का गौरव हासिल है। बाद में उन्होंने टीवी पर इस सिलसिले को जारी रखा और अपने यात्रा वृतांत को बावन एपीसोड में पेश कर नई नज़ीर कायम की थी। ह्यूज ने अपने लेखन से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घुमक्कड़ लेखक के तौर पर पहचान बनाई। गैंट्जर दंपति के बारे में यह बात मशहूर है कि साल में छह महीने दोनों सफ़र पर रहते हैं और घुमक्कड़ी के अनुभवों को साझा करते हैं।
गैंट्जर दंपति भारत को अपने तरीक़े से देखने और समझने की कोशिश करते हैं और हर यात्रा के बाद कुछ नया अनुभव बटोर लाते हैं। दोनों ने यात्राओं के इस सिलसिले को अब भी बरक़रार रखा है। अपनी यात्राओं को उन्होंने जिस रूप-रंग में देखा है उन्होंने उसे क़लमबंद भी किया है। घुमक्कड़ी पर उनकी दो पुस्तकें ‘द वाईब्रेंट वेस्ट’ और ‘द हिस्टोरिक साउथ’ में इसका अक्स देखा जा सकता है। इन किताबों के ज़रिए जीवन के राग-विराग को तो देखने-समझने में मदद मिलती ही है, संस्कृतियों, कलाओं और परंपराओं को भी बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। दोनों ही किताबें भारत के इतिहास, कला, संस्कृति और परंपरा को हमारे सामने रखती हैं। अच्छी बात यह है कि इन पुस्तकों में लेखकों ने बातचीत की शक्ल में भारतीय परंपरा, संस्कृति और कलाओं को हमारे सामने रखा है जो पढ़ने में एक अलग तरह का मज़ा देती है। फिर पन्ने-पन्ने पर छपी तस्वीरें जीवन के कई-कई रंगों को हमारे सामने लाकर रखती हैं, उन रंगों में हम अपने देश की विरासत, सभ्यता, संस्कृति, पर्व-त्यौहारों का अक्स देखते हैं। वे तस्वीरें बहुत शिद्दत से हमसे बोलती-बतियाती हुई न सिर्फ हमें अपनी अतीत से जोड़ती हैं बल्कि वर्तमान को भी सामने रखती है।
‘द वाईब्रेंट वेस्ट’ के शुरुआती आलेख में भारत के पहले शहर धोलावीर की जानकारी मिलती है। लेखक द्वय ने 2006 बीसी में आबाद इस भारतीय शहर की जानकारी दी है। इसके अलावा अजमेर, जैसलमेर, अनासागर सहित दूसरी जगहों का ज़िक्र विस्तार के साथ किया गया है। ‘द हिस्टोरिक साउथ’ में दक्षिण के राज्यों में फैली हमारी संस्कृति और सभ्यता को सामने रखा गया है। गोलकुंडा, हंपी, उडुपी, चारमीनार का ज़िक्र विस्तार के साथ मिलता है फिर इन शहरों के जीवन-दर्शन को भी नज़दीक से देखने की कोशिश की गई है। दोनों किताबें घुमक्कड़ी के शौकीनों के लिए बेहतरीन तोहफ़ा है। यों तो किताबें अंग्रेजी में हैं, लेकिन हिंदी के पाठकों को भी यह पुस्तक पसंद आएगी क्योंकि भाषा सरल और सहज है और इनमें देश के इन हिस्सों के कई ऐसे अनछुए पहलू को हमारे सामने रखा गया है जिनसे हम पूरी तरह वाक़िफ़ नहीं थे।
पुस्तकः द हिस्टोरिक साउथ, द वाईब्रेंट वेस्ट (यात्रा वृतांत)।
लेखक: ह्यूज गैंट्जर और कौलीन गैंट्जर।
प्रकाश्क: नियोगी बुक्स, डी-78, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया-फेज एक, नई दिल्ली-110020।
मूल्य: 395 रुपए प्रत्येक। - फ़ज़ल इमाम मल्लिक - फ़ज़ल इमाम मल्लिक

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