बीते दो-तीन दशकों में जिस तेजी से दुनिया बदली है, उसी गति से मानवीय रिश्तों में भी बदलाव आया है। एक समय था जब मैत्री का विशिष्ट अर्थ था, चाहे वह दो समुदायों के बीच हो या दो देशों के बीच। दो व्यक्तियों के बीच भी मित्रता में विश्वास का बड़ा महत्व था, जिसे ईमानदारी से निभाया जाता था। पौराणिक आख्यानों में राम-सु्ग्रीव मैत्री एक ऐसा उदाहरण है, जो भारतीय मानस पटल पर आज भी अंकित है। इस मैत्री से आज की उस युवा पीढ़ी को सीखना चाहिए जो दोस्ती को 'फास्ट फूड' की तरह समझते हैं या जो सिर्फ 'यूज' करने के लिए दोस्त बनाते हैं। मैत्री अनायास ही कब और किससे हो जाए, कहा नहीं जा सकता। मगर आजकल फ्रेंडशिप डे पर दोस्त बनाने का एक नया चलन शुरू हुआ है। फ्रेंडशिप बैंड बेचने की आड़ में दोस्तों के बीच बाजार भी घुस आया है।
दौर बेशक बदल जाए मगर दोस्ती में अपेक्षाएं कभी नहीं बदलतीं। खासतौर से निस्वार्थ भावना और एक दूसरे पर विश्वास। युवा पीढ़ी में कुछ युवा अपवाद हो सकते हैं, मगर वह भी यही चाहती है कि मित्र 'संकट' के समय साथ न छोड़े। इसीलिए सच्चा दोस्त एक दुआ है। भगवान का आशीर्वाद है। बुरे वक्त का साथी है। कभी परेशान हो तो, वह हंसाने आ जाता है, कभी मुश्किल में हैं तो वह आपको सही रास्ता दिखाता है। दोस्ती का यह रिश्ता अफेक्शन, विश्वास और ईमानदारी पर टिका होता है। सच्चा दोस्त आपके जीवन को खुशियों से भर देता है। आपको खास महसूस कराता है, और आपका बेहद ध्यान रखता है। सबसे बड़ी बात यह कि एक अच्छा दोस्त आपके जीवन की पूंजी होता है, जिसे आप हमेशा सहेज कर रखना चाहते हैं।
मगर आज दोस्ती पहले जैसी नहीं रही। अब न तो वह मदद की भावना रह गई न ही मुश्किलों में साथ देने का जज्बा। छोटी-छोटी बात पर दोस्तों के बीच मतभेद हो जाना आम बात है। दोस्ती में दगा पहले भी लोग देते थे मगर हजारों में एक अपवाद होता था। मगर आज आए दिन ऐसी खबरें पढ़ने को मिल जाती हैं कि एक ने दूसरे दोस्त को चाकू घोंपा। या फिर दोस्त ने भी अगवा करा कर फिरौती मांगी। या फिर दोस्त ने ही पत्नी को प्रेमजाल में फंसाया। दोस्ती में विश्वासघात की ऐसी खबरें विचलित कर देती हैं।
पिछले कुछ सालों में सामने आई फ्रेंड साइटों पर दोस्ती के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। मगर इसके पीछे का सच कुछ और ही होता हैं। अपनी पहचान छुपाकर, अपनी उम्र छुपाकर लोग दोस्ती के नाम पर धोखा देते हैं। मुश्किलों में साथ निभाने का वादा करके सामने वाले के लिए मुश्किल खड़ी कर देते हैं। छोटी उम्र की टीनेज लड़कियां ऐसी दोस्ती की जाल में आसानी से फंस जाती हैं फिर उम्र भर के लिए पछताती हैं।
दोस्ती के नाम पर कई लड़के भावुक लड़कियों को धोखा देते हैं और उनका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। हाल में किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है कि कोई भी युवक या पुरुष किसी युवती या महिला का दोस्त नहीं हो सकता। शोधकर्ताओं की मानें, तो किसी भी युवक का युवती से दोस्ती करना मात्र यौनाकर्षण होता है। अगर महिलाओं की मानें तो वह किसी युवक से दोस्ती करते वक्त सिर्फ यही सोचती हैं कि वे उनके अच्छे दोस्त बनेंगे। मगर ऐसा होता नहीं।
जीवन में ऐसे कुछ लोग भी मिलते हैं, जिनसे उम्र के आखिरी पड़ाव तक दोस्ती निभाई जा सकती है। ऐसे दोस्तों में दूसरे दोस्त से न तो जलन की भावना होती है और न ही उनसे कोई गिला-शिकवा होता है। ऐसे व्यक्ति अपने दोस्त की हर बात सुनते हैं, हर परेशानी में साथ देते हैं। उनका दुख-सुख बांटते हैं। एक तरफ जहां बदलते दौर में दोस्ती की परिभाषा बदली है वहीं आज भी कई ऐसे लोग हैं, जो दोस्ती का मतलब जानते हैं। भागती-दौड़ती जिंदगी में भले ही वे एक दूसरे साथ वक्त न बिता पाएं, पर संपर्क में जरूर रहते हैं और जीवन की अच्छे-बुरे अनुभव भी बांटते हैं।
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