-- खुशवंत सिंह
मुझे लगता है कि उर्दू शायरी का अंगरेजी में बेहतरीन अनुवाद विक्टर कीरमैन ने किया है। वह अनुवाद फैज अहमद फैज की शायरी का है। वह दरअसल जुगलबंदी है। यह उस दौर की बात है, जब कीरमैन लाहौर के चीफ्स कॉलेज में अंगरेजी पढ़ा रहे थे। फैज तब एक हिन्दुस्तानी कॉलेज में अंगरेजी पढ़ाते थे। कीरमैन की एक हिन्दुस्तानी बीवी थी। वह खूब हिन्दुस्तानी जानती थी। इन लोगों की आपस में दोस्ती हो गई। सबने मिलकर अनुवाद पर काम किया। उसे पढ़ने में मजा आता है।
मैं यह भी मानता हूं कि उसके बाद उर्दू शायरी का सबसे अच्छा अनुवाद मेरा ही है। मैंने किसी भी हिन्दुस्तानी या पाकिस्तानी या अंगरेज से बेहतर अनुवाद किया है। उर्दू शायरी को शायद मैं उनसे बेहतर समझता हूं। उसे करने का मेरा तरीका बिल्कुल सीधा है। मैं पहले उस शायरी को याद कर लेता हूं। रात में सोने से पहले उसे दोहराता रहता हूं। फिर जो मुझे महसूस होता है, उसे अनुवाद में ढाल देता हूं। हो सकता है कि लोगों को वह थोड़ा भटका हुआ लगे! एक बात जरूर है कि लोगों ने मेरे अनुवादों को बेहद पसंद किया है। मैंने इकबाल का अनुवाद किया है। शिकवा और जवाब ए शिकवा को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने छापा है। अब तक उनके 14 संस्करण छप चुके हैं। और लगातार बिक रहे हैं। कामना प्रसाद के साथ भी जिन किताबों पर मैंने काम किया है, वह खूब सराही जा रही हैं। उनमें अनुवाद तो मेरा ही किया हुआ है। पेंगुइन से आई ‘सेलिब्रेटिंग द बेस्ट ऑफ उर्दू पोएट्री’ को लोगों ने हाथोंहाथ लिया। एक नज्म का आप भी लुत्फ उठाइए-
रात यूं दिल में तेरी खोई हुई याद आई।
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाए।।
जैसे सहरों में हौले से चले बाद ए नसीम।
जैसे बीमार को बेवजह करार आ जाए।।
मीर तकी मीर
उर्दू शायरी के प्रशंसकों को मीर (1722-1810) से बेहद लगाव है। उनका जन्म आगरा के पास एक गांव में हुआ था। लेकिन उन्होंने ज्यादातर वक्त दिल्ली में ही बिताया। पीने वालों पर मीर ने जो लिखा, उसे खूब याद किया जाता है। जरा देखिए तो सही-
मैं नशे में हूं।
यारो मुझे माफ करो
मैं नशे में हूं।
अब दो तो जाम खाली ही दो
मैं नशे में हूं।
मस्ती से बरहमी हैं मेरी गुफ्तगू के बीच
जो चाहो तुम भी मुझको कहो
मैं नशे में हूं।
माजूर हूं, तो पांव मेरा बेतरह पड़े
तुम मुझसे तो सरगरीबां न हो
मैं नशे में हूं।
भागी नमाज ए जुम्मा तो जाती नहीं हैं कुछ
चलता हूं मैं भी तुम तो रहो
मैं नशे में हूं।
नाजुक मिजाज आप कयामत हैं मीर जी
जूं शीशा मेरे मुंह न लगो
मैं नशे में हूं।
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